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राजा रामन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केन्द्र

लेसर

भारत में लेसरों के महत्व को शीघ्र ही मान्यता प्राप्त हुई तथा साठवीं सदी के पूर्व में लेसरों पर अनेक भारतीय प्रयोगशालाओं ने कार्य प्रारम्भ किया । मुम्बई स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र (बी.ए.आर.सी.) अर्धचालक लेसर को विकसित करने वाली भारत की उन प्रथम प्रयोगशालाओं में से एक है, जिसका उपयोग 30 कि.मी. दूरी से अधिक प्रकाशीय संप्रेषण संपर्क स्थापित करने हेतु किया गया था । तब से, डॉ. दि.दे.भवालकर के नेतृत्व में भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र में कार्यक्रम का विस्तार अन्य महत्वपूर्ण लेसरों के विकास को शामिल करने एवं अरैखिक प्रकाशिकी लेसर प्लाज्मा पारस्परिक प्रभाव इत्यादि जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान कार्य करने के लिये किया गया । अब केट को भारत सरकार द्वारा लेसर विकसित करने वाली उस प्रमुख संस्था के रुप में स्थापित किया जा चुका है, जो राष्ट्रीय लेसर कार्यक्रम के संयोजन एवं क्रियान्वयन में केन्द्र को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रमुख भूमिका निभा रहा है।

भारत में लेसर प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने की दिशा में आरआरकेट, भारतीय लेसर संघ का मुख्यालय है जो लेसर अनुसंधान/विकास/शिक्षा/विनिर्माण उपयोग आदि संस्थाओं में सम्पूर्ण भारत में कार्मिकों का एक संघ है।

राजा रामन्नाा प्रगत प्रौद्योगिकी केन्द्र विभिन्न प्रकारों के लेसर, लेसरों से संबधित संघटक एवं लेसर आधारित यंत्र विकसित कर रहा है। उद्योगों, दवाई एवं मूलभूत विज्ञान में लेसरों के अनुप्रयोगों में अनेक अनुसंधार्नकत्ता भी कार्य कर रहे हैं ।

 

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